ओ निज स्वरूप सम्हारो, सहज समाधि लग जाई।।
लगा सुखासन सीधा बेठो, आवत जावत श्वास समराई।।
ओ निज स्वरूप…..
नासिका के द्वारों को देखो, श्वास कैसे आवत जाई।।
पूरा तन विश्राम रखो, देखो श्वास क्या क्रिया कराई।।
ओ निज स्वरूप…..
घड़ी दो घड़ी नित्य ध्यान करो, मन की कल्मष मिट जाई।।
जब मन होगा पूर्ण निर्मल, सोई सहज समाधि भाई।।
ओ निज स्वरूप…..
अवधूत देवीदास के प्रताप से लक्ष्मीनारायण अनुभव गाई।।
ओ निज स्वरूप…..