नेति नेति करि जाहि वेद बखाने, गुरु कृपा से वाहे हम घट में जाने।।
एक अखण्ड अजन्मा ब्रह्म हैं, वो सतचित आनन्द रूप हम पहिचाने।
नेति नेति करि…..
अकथ अगाध अनन्त वो अविनाशी, वो तो ऊर्जा बनि जगत समाने।।
एक नाम रूप नहिं उसका, उसका नाम रूप निज मन माने।।
नेति नेति करि…..
भाव अनुसार उसकी ऊर्जा जुड़ती, देता फल वो भाव पहिचाने।।
दृष्टा बनकर वो रहता जग में, लीला करता वो भाव अनुमाने।।
नेति नेति करि…..
करुणामय है स्वभाव उसका, सोई करुणानिधान करि हम जाने।।
प्राण डोर से जग को बाँध रखा उसने, पल-पल की खबर वो सब जाने।।
नेति नेति करि…..
दयानिधि दयामय स्वरूप है उसका, लक्ष्मीनारायण निज अनुभव बखाने।।
नेति नेति करि…..