प्रभु ने सब पर कृषा बरसाई रे।
प्रभु है जीव चराचर के पिता, प्रभु ने ही सब सृष्टि रचाई रे।।
अपना पराया नहिं है प्रभु का कोई, प्रभु ने तो समता की दृष्टि फैलाई रे।।
प्रभु ने सब पर…..
एक अखण्ड अनाम है प्रभु, ऊर्जा बनि सब जगत समाई रे।।
एक ऊर्जा से सब जगत को बनाया, भाव की लीला रचाई रे।।
प्रभु ने सब पर…..
अकथ अगाध अनन्त स्वरूप प्रभु का, भगत के हृदय में प्रकटाई रे।।
प्रभु ने करी तगड़ी कलाकारी, जगत बनाकर मन में दिया छुपाई रे।।
प्रभु ने सब पर…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, हरि ही हरि का मरम बताई रे।।
प्रभु ने सब पर…..