गुरु के गुण गा ले रे, भव रजनी के दु:ख मिटाले रे।।
सर्वव्यापक है गुरु की सत्ता, बिनु गुरु नहिं हिलता पत्ता।।
गुरु ही सबको पाले रे।।
गुरु के गुण…..
गुरु हैं करुणा के सागर, गुरु हैं जग के नट नागर।
गुरु बल से सृष्टि चाले रे।।
गुरु के गुण…..
गुरु हैं कर्म विधाता, गुरु हैं सुख के दाता।
अब तो गुरु कृपा चाहले रे।।
गुरु के गुण…..
जिसने भी गुरु को रिझाया, मनोवांछित फल वो पाया।
अब तो गुरु को रिझाले रे।
गुरु के गुण…..
गुरु की शरण सदा सुखदाई, लक्ष्मीनारायण अनुभव गाई।
अब तो गुरु कृपा में नहाले रे।।
गुरु के गुण…..