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Lyrics

हे परम पिता (He Param Pita)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे परम पिता हे प्रभु रोम रोम रमता तू राम कहाए। शव का है मालिक तू सो शिव सुहाए॥ इला का है स्वामी सोई अल्लाह बताए। स्वर में तू वास करे सो ईश्वर जनाए॥ जब हो ज्ञान तेरा तब जीव बुद्ध बन जाए। मन हो जाए कृष तब तू कृष्ण कहलाए॥ सबका पालन तू करता तू ही माता बन जाए। जब जीते इन्द्रि सारी तू महावीर हो जाए॥ नाना नाम सुनि सुनि बिरथा जग भरमाए। एक है परमपिता तू तेरी कृपा ही समझाए॥ कृपा मिलती जीव को जब शरण वो आए। नर है अयन तेरा सोइ नारायण नाम धराए॥ दुर्ग समान अभेद है तू सोई दुर्गा कहलाए॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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