हे गुरुदेव तेरे चरणों में कोटि कोटि नमन हमारा
हे गुरुदेव तेरे चरणों में कोटि कोटि नमन हमारा।
ब्रह्मा विष्णु महेश के तुम्हीं हो पालन हारा।
तुम्हीं तेज सूरज चन्दा तुमने अखण्ड ब्रह्माण्ड धारा।
तुम्हीं ऊर्जा की शक्ति हो तुम्हीं सबके पालनहारा ॥
करुणा का तू सागर है तेरी लीला अपरम्पारा ॥
तेरी अकथ अगाध कहानी नेति नेति तोहि वेद पुकारा।
अब हम आए शरण तिहारी नाथ तू ही हमारा सहारा ॥
बल बुद्धि से तू नहीं मिलता अब है पूर्ण समर्पण हमारा ॥
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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