मिट्टी के पुतलों में जो बोले वो ही जगत का राम है
मिट्टी के पुतलों में जो बोले
वो ही जगत का राम है ।
मन्दिर मस्जिद में जो बैठा
वो सब तो इन्सान का काम है ॥
ऊर्जा ही शक्ति शक्ति ही ब्रह्म
ब्रह्म अखण्ड वो तो अनाम है ।
सब काल सब दिशा में जो रहता
प्राणियों का घट ही उसका धाम है ।
विधि का विधान स त्य जान
जैसा कर्म वैसा फल ये तो प्रकृति का पैगाम है ।
ना मूरत ना सूरत कण कण वासी वो
सृजन पालन लय सब उसीका काम है ॥
सहज दयाल अति कृपाल पिण्ड में ब्रह्माण्ड समाए ।
गुण गोतीत एकरस सब सुखों का वो धाम है ॥
जाति पंथ नस्ल भेद सब इन्साँ ने बनाए ।
वो ना हिन्दू ना मुसलमाँ वो तो लक्ष्मी का राम है ।
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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