यश इच्छा
साधु भाई
यश इच्छा में सब जग बोराया ।
धन दौलत सुत इच्छा सबको सताया ।
साधु भाई .........................
दया दान भजन का पाखण्ड कराया ।
यश की इच्छा रातों का निंद गवायाँ ॥
साधु भाई .........................
कर्जा लेकर यश हेतु महल बनाया ।
ऐसी तड़प लगी मन सुख नहीं पाया ॥
साधु भाई .........................
यश इच्छा ने जीव गुलाम बनाया ।
यश ने बना तैली बैल जग घुमाया ॥
साधु भाई .........................
धीर वीर मुनि ग्यानी सब भरमाया ।
ऐसा भँवर जाल पड़ा जीव फँसाया ॥
साधु भाई .........................
कहत लक्ष्मी सुन रे मेरा भाया ।
हरि शरण आ जा क्यों भटकाया ॥
साधु भाई .........................
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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