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Lyrics

सहज समाधी (Sahaj Samadhi)

Satyavani Bhajan (Part-1)
सहज समाधी (Sahaj Samadhi) सुनो रे बन्धु सहज समाधी सिखाऊँ । मरम सकल सरल राह समझाऊँ ॥ गुरु की मूरत अँखियों में राखो । बैठो होकर सहज ध्यान लगवाऊँ ॥ गुरु मन्त्र को श्वासा में मिलालो । बाहिर भीतर तोही एक कराऊँ ॥ चित्र भिति को तू स्थिर कर ले । तुरत तो ही सहज समाधी पहुँचाऊ ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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