Loading...

Lyrics

हे परम पिता (He Param Pita)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे परम पिता हे परम पिता तुझसे कैसे बातें कर पाऊँ । मन मचल रहा है मेरा कैसे व्यथा सुनाऊँ ॥ मान अपमान के बाण लगे है दिल में । राग द्वेष के भाव उमग रहे है मन में ॥ अब तू ही बता कैसे मैं बच पाऊँ । हे परम पिता तुझसे कैसे बातें कर पाऊँ ॥ निस दिन अपने-परायों की चिन्ता सताती है । मोह की चलती हवा ग्यान दीप बुझाती है ॥ अब तू ही बता कैसे मैं मुक्ति पाऊँ । हे परम पिता तुझसे कैसे बातें कर पाऊँ ॥ वासना की खुशबु में मन मेरा ललचाता है । आज का चिन्तन छोडो कल का ज्यादा सताता है ॥ अब तू ही बता कैसे तूझको पाऊँ । हे परम पिता तुझसे कैसे बातें कर पाऊँ ॥ नश्वर काया अमर मान लिया मन नहीं वश में । भाव का रोग लगा चिन्ता सता रही तन में ॥ अब तू ही बता कैसे मैं सुख पाऊँ । हे परम पिता तुझसे कैसे बातें कर पाऊँ ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
Special Thanks and credits to HTML Codex