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Lyrics

हे गुरुदेव मेरे दिल की व्यथा को समझो रे (Hey Gurudev mere Dil ki vyatha ko Samajho)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे गुरुदेव मेरे दिल की व्यथा को समझो रे हे गुरुदेव मेरे दिल की व्यथा को समझो रे । तेरे बिनु मेरा सहारा नहिं अब तो कुछ बोलो रे ॥ कर्म का बन्धन जकड़ा मुझको अबतो तुम खोलो रे । भावों के भवसागर में डूबा अब तो मुझको तारो रे ॥ मोह का फंदा दिल में अटका अब तो मोहि निवारो रे । कहत लक्ष्मी सुनो सतगुरुदेव अब तो शरण में लेलो रे ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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