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Lyrics

गुरु (Guru)

Satyavani Bhajan (Part-1)
गुरु अरे गुरु कहाँ ढूँढ़े जग में तू झांक तो सही तेरे मन में ।। मन्दिर मठ मस्जिद गुरु द्वारा ये सब फांसी के फन्दे ।। अन्तर गुरु को जगा ले तू ये जगत गुरु सब अन्धे ।। काम क्रोध मद द्वेष बढ़ाते हैं खुद ना बन पाये दुनिया को शिष्य बनाते हैं ।। मन्दिर -मस्जिद की दीवार खड़ी कर इन्साँ को इन्साँ से लड़ाते है । भोली भाली दुनियाँ सारी । समझ न पाये इनकी होशियारी । मजहब का अर्थ न जाने पर मजहब पढ़ाते है ।। एक है सबका जगत पिता फिर भी उसके नाम पर लड़ाते है । कहत लक्ष्मी सुनो भाई साधु ऐसे जगत गुरू भरमाते है ।। ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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