भगवान कहाँ है ?
तेरा भगवान जो दसरथ पुत्र राम है
तो बता फिर मुसलमाँ का क्या धाम है ?
तेरा भगवान जो यशोदा का श्याम है
तो बता फिर ईसाई का क्या नाम है ?
तेरा भगवान जो ऊँच नीच का ग्यान है
तो बता तू कैसे पशु पक्षि से महान है ?
तेरा भगवान जो मठ मन्दिर में बैठा करता विश्राम है
तो बता फिर मस्जिद में बैठा अल्लाह क्यों बदनाम है ?
तेरा भगवान जो हरि नाम का शौकिन है
तो फिर अल्लाह के नाम पर क्यों लगती नमकीन है ?
भगवा वस्त्र से तेरा खुश रहता भगवान है
तो बता फिर टोपी का हक क्यों नही मुसलमान है ?
झालर बजा कर तू भगवान को उठाता है
तो फिर बता मुल्ला की बांग पर क्यों ऐतराज जताता है ?
खुद की नादानी भगवान के नाम पर छुपाता है
मस्जिद में बैठा मुल्ला भी गलती लुकाता है ।
सच्चा ग्यान सुनि धरि ध्यान सबका एक ही भगवान है
वो ही अल्लाह वो ही ईश्वर ना कोई हिन्दु ना मुसलमान है ।
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‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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