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Lyrics

कैसे रीझे भगवान (Kaise Reejhe Bhagwan)

Satyavani Bhajan (Part-1)
कैसे रीझे भगवान हे भगवान तुझे मैं कैसे रिझाउँ प्रेम से जो तू रीझे प्रेम कहाँ से लाउँ ।। राग द्वैष में जल रहा मैं तुझसे क्या छुपाउँ ।। हे भगवान........................... श्रद्धा से जो तू रीझे तो श्रद्धा कहाँ से लाउँ ।। तर्क में उलझ रहा मैं तूझे अब कैसे समझ पाउँ ।। हे भगवान........................... नाम सुमिरण से जो तू रीझे तो कौनसा नाम सुनाउँ ।। सब नाम तो है तेरे फिर एक नाम कैसे चुन पाउँ ।। हे भगवान........................... मन्दिर-मस्जिद में जो तू मिलता तो वहाँ कैसे मै पहुचाउँ ।। मुल्ला पुजारी ठगते जग को मन को कैसे विश्वास कराउँ ।। हे भगवान........................... ग्यान से जो तू मिलता तो कैसे ग्यान मैं पाउँ ।। बिनु ध्यान के ग्यान न होता बिनु आधार किसका ध्यान लगाउँ ।। हे भगवान........................... ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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