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Lyrics

भगवान उवाच (Bhagwan Uvach)

Satyavani Bhajan (Part-1)
भगवान उवाच हे सुनु जीव तुझे समझाऊँ तू कर अनुराग प्रेम मैं उपजाऊँ । अपना-पराया भूल तू तेरा राग द्वेष मिटाऊँ ।। हे सुनु जीव....................................... कर भरोसा मुझ पर तुझे मै श्रद्धा दिलाऊँ । विश्वास कर पैदा तू तूझे तर्क से मैं मुक्त कराऊँ ।। हे सुनु जीव....................................... सब नाम तो है मेरा अब तेरा भ्रम मिटाऊँ । सुकृत कर्म कर तू हर नाम से मैं चला आऊँ ।। हे सुनु जीव....................................... मन्दिर-मस्जिद मेरा घर नहीं वहाँ मैं नहीं जाऊँ । मुल्ला पुजारी मेरे ठेकेदार नहीं कर विश्वास तूझे सत्य बताऊँ ।। हे सुनु जीव....................................... ग्यान से मैं मिलता तुझे ग्यान का रहस्य बताऊँ । कण कण रुप है मेरा तू कर ध्यान ग्यान उपजाऊँ ।। हे सुनु जीव....................................... निर्मल करले श्वास तू तेरे सब विकार मिटाऊँ । चिन्तन कर तू मेरा तेरी सूरता में चला आऊँ ।। हे सुनु जीव....................................... सब राह है मेरी फिर भी तूझे बताऊँ । सब छोड शरण आजा तू हे जीव तूझे परम पद दिलाऊँ ।। हे सुनु जीव....................................... ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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