भला सोच तू भला ही होगा
भला सोच तू भला ही होगा।
दुश्मन कहाँ खोजे तू वो तो तेरे दिल में ही बैठा होगा ॥
तू ही तेरा दुश्मन है तू ही तेरा यार होगा।
सुख दुख नहिं जग में जो तूने सोचा वो ही तूने भोगा ॥
सबसे प्रेम करो सबसे सम्बन्ध अच्छा रखना होगा।
खुद जो चाहो यश तो दूसरों को यश देना होगा ॥
सहायता का भाव रख सदा सुखी तू होगा।
प्रतिवेशी से मधुरता रख तू निश्चयी यशस्वी होगा ॥
दीन दुखियों के आँसू पोंछ दिल में भगवान प्रकट होगा।
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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