पूज्य गुरुवर तुम्हें नमन कोटि हजार
पूज्य गुरुवर तुम्हें नमन कोटि हजार
मेरी काम गति तुमने राम गति करदी
तुमने बरसादी करूणा की धार।।
पूज्य गुरुवर.....
भावों के भवसागर में डुबी थी मेरी नैया
दया कर तुमने करा दी पार।।
मोह के बन्धन में मैं जकड़ा था
तुमने कटा दिया दे ज्ञान की तलवार।।
पूज्य गुरुवर.....
विषय-विकार मुझे सता रहे थे
तू ने कर दिया मुझे निर्विकार।।
जीवन-मरण का भय सता रहा था मुझको
तूने कर दिया निर्भय पिला अमृत की धार।।
पूज्य गुरुवर.....
लक्ष्मीनारायण को सदा शरण में रखना गुरुवर
अब तज दिया मैंने मद माया मोह अहंकार।।
पूज्य गुरुवर.....
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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