Loading...

Lyrics

ओ बन्दे मरना सीख ले

Satyavani Bhajan (Part -4)
ओ बन्दे मरना सीख ले ओ बन्दे मरना सीखले अमर हो जायेगा। सतगुरु की शरण में रहले अमरपद पायेगा। मरने से जब तक डरेगा मर मर करके फिर जन्मेगा बिरथा जग में भय खायेगा।। ओ बन्दे.... पाँच तत्व बीज है तन का विषय-वासना कारण है जन्म का तू तज वासना समझ में आ जायेगा।। ओ बन्दे.... तू तो है सतचित आनन्द एक रस निज स्वरूप को तू जान ले बस तेरा आवागमन मिट जायेगा।। ऊर्जा ही शक्ति और शक्ति का सब खेला वासना के कारण बना जगत का मेला ऊर्जा से ऊर्जा मिले मूल मिल जायेगा।। ओ बन्दे.... लक्ष्मीनारायण ले ले सतगुरु की शरण मिट जायेगा तेरा जन्म और मरण सहज अमरपद पायेगा।। ओ बन्दे.... ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
Special Thanks and credits to HTML Codex