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Lyrics

हे सतगुरु कैसे आऊँ तेरे द्वारे

Satyavani Bhajan (Part -4)
हे सतगुरु कैसे आऊँ तेरे द्वारे हे सतगुरु कैसे आऊँ तेरे द्वारे, माया मुझे अटकाती रे। काम, क्रोध की ये तरंग उठाती, पल-पल जग में भरमाती रे।। हे सतगुरु .... मोह का ये जाल बनाकर, राग-द्वेष में उलझाती रे।। भ्रम का ऐसा जाल फैलाती, बैल कोल्हू का बनाती रे।। हे सतगुरु .... दो दिन का है जीवन का खेला, फिर भी ये नहि समझाती रे।। जब-जब याद करूँ सतगुरु तुझको, माया नटनी नाच नचाती रे।। हे सतगुरु .... अब तो बचाले सतगुरु मुझको, माया मुझे बहुत सताती रे।। सतगुरु की शरण में जाने से, माया तुरत भग जाती रे।। हे सतगुरु .... ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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