सुनि सुनाई बातों में
सुनि सुनाई बातों में मत भरमा मेरे भाई रे।
गुरु मंत्र का जाप करले, मंजिल पहुँच जाई रे।।
थोथी कथनी बहुत कथें, कथनी में सार नांई रे।।
बात तभी बनेगी, गुरु चरणों में लो ध्यान लगाई रे।।
श्रद्धा से मन्त्र का जाप करो, सहजहिं हियँ ज्ञान उमगाई रे।।
मन्त्र जपना बिनु रूप के, हृदय में प्रगटेगें साईं रे।
थोथी कथनी कथ कथ करके, धूर्त निज दुकान चलाई रे।।
सबके घट में प्रभु बसै, गुरु मन्त्र से समझ पाई रे।।
गुरु पर श्रद्धा भाव रखना, सहजहि सब बात बन जाई रे।।
अवधूत देवीदास के प्रताप से, लक्ष्मीनारायण अनुभव गाई रे।।
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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