सतगुरु के दरबार में हीरे मोती लाल
सतगुरु के दरबार में, बरसे हीरे मोती लाल।
काँच किरिच को नुगरा ध्यावैं, या विधि भए कंगाल।।
सतगुरु के.....
सगुरा पहुँचा सतगुरु के दरबार में, वो तो हो गया मालामाल।
ज्ञान की मणि सतगुरु देते, विद्या धन से कर देते निहाल।।
सतगुरु के.....
दिवस रैन चैन नहिं नुगरा को, काम, क्रोध, मद, लोभ का पड़ा जंजाल
सगुरा नित मौज करे जग में, सतगुरु की कृपा कमाल।।
सतगुरु के.....
लक्ष्मीनारायण कहता सुनो रे बन्धु, सतगुरु शरण लेकर हो जावो निहाल।।
सतगुरु के.....
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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