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Lyrics

अवधू सहज ध्यान लगावो रे

Satyavani Bhajan (Part -4)
अवधू सहज ध्यान लगावो रे अवधू सहज ध्यान लगावो रे। राम का नाम जपो लय लाकर, मन में रूप मत कल्पावो रे।। अवधू सहज.... सुख आसन पर बैठो सुख से, तन अपना विश्राम करावो रे।। दृष्टि को निज तन पर ले आवो, मत बिरथा जग में भरमावो रे।। अवधू सहज.... जीभ्या को स्थिर करलो मुख में, बिनु रूप राम राम जपावो रे।। सहज में ध्यान लगेगा तुम्हारा, लक्ष्मीनारायण की जुगति अपनावो रे। अवधू सहज.... ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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