हे सतगुरु तू है जगत की सरकार
हे सतगुरु तू है जगत की सरकार।
मैं आया हूँ अब प्रभु तेरे द्वार।।
तेरी सत्ता बिनु पत्ता नहि हिलता।
सब जगत प्रभु तुझसे ही चलता
नाथ तेरी लीला अपरम्पार।।
हे सतगुरु तू है.....
बिनु सेना बिनु पुलिस तू शासन चलाए
तेरी नजर से प्रभु कोई बच नहिं पाए
तेरी विधि का गजब दरबार।।
हे सतगुरु तू है.....
जैसा कोई करता वैसा तू फल देता
राजा रंक फकीर चाहे हो कोई नेता
तू रखता नहिं किसी का उधार।।
हे सतगुरु तू है.....
बिनु कर तू कर्म करता
बिनु पद तू सदा चलता
तेरी करणी अलौकिक अपार।।
हे सतगुरु तू है.....
लक्ष्मीनारायण की विनती सुन लेना
अपने चरणों में शरण तू देना
तुझे नमन प्रभु कोटि हजार।।
हे सतगुरु तू है.....
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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