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Lyrics

सुरता तो शब्द बिनु आँधरी

Satyavani Bhajan (Part -4)
सुरत तो शब्द बिनु आँधरी, गुरु बिनु कौन शब्द समझाय रे।। बिनु शब्द तो सुरता, बिरथा जग में भरमाय रे।। सबके घट में कल्पतरु है, ताकि बेल में सुरता उलझाय रे।। जब मिल जाए सतगुरु पूरा, सुरता का बन्धन देय खुलाय रे।। सतगुरु ही शब्द से परिचय कराता, जानत शब्द सुरता आँख खुलाय रे।। सुरता जब मिलै शब्द में, वाको काल न खाय रे।। लक्ष्मीनारायण बलिहारी सतगुरु की, ताके बल से भरम लियो मिटाय रे।। ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangeet Ki Jubani, Satyavani Sangit Mahotsav,
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