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Lyrics

हे प्रभु मेरी विनती रख लो (Hey Prabhu Meri Vinti Rakh Lo)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे प्रभु मेरी तुम विनती रख लो । हे प्रभु मेरी तुम विनती रख लो । तुम सूरज हो तो मुझे किरण बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम जल हो अगर तो मुझे मीन कर डालो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो अगर चन्दा तो मुझे चाँदनी रसालो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो हवा तो प्रभु मुझे सुगन्ध बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो अगर दीप तो मेरी ज्योति जलालो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो गुरु तो प्रभु मुझे शिष्य बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो प्रभु वक्ता तो मुझे वाणी बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो अगर दृष्टा तो मुझे दृष्टि बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो अगर आकाश तो मुझे नक्षत्र बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो जग मल्लाह तो मुझे नाव बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो भगत रक्षक तो मुझे अपना भगत बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो स्वामी अगर तो मुझे सेवक बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... तुम हो साधना प्रभु तो मुझे साधक बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... कहत लक्ष्मी सुनो रे प्रभु मुझे अपना बना लो ॥ हे प्रभु .......................................... ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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