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Lyrics

सतगुरु शरण (Satguru Sharan)

Satyavani Bhajan (Part-1)
सतगुरु शरण सतगुरु शरण चल जीव तेरी नैया पार लग जावे रे । काम क्रोध के भंवर पड़ गए जल्दी कर नहीं डूब जावे रे । सतगुरु शरण ............................ कर्म फल का बोझ पड़ा बन्धन बेल उलझ जावे रे । सतगुरु शरण ............................ मद लोभ के मगर मच्छ घने देख देख तू मत घबरावे रे । सतगुरु शरण ............................ मोह का जल चढ़त नाव पर होले होले यह तोय डूबावे रे । सतगुरु शरण ............................ बिरती बिराग की तू सील लगा मोह का जल रुक जावे रे । सतगुरु शरण ............................ दया धर्म की राह पकड़ सतगुरु घाट तोय मिल जावे रे । सतगुरु शरण ............................ श्वास का तू लंगर लगा ले नाव तेरी बच जावे रे । सतगुरु शरण ............................ राम नाम की सीढ़ी लगा सतगुरु द्वार तोय मिल जावे रे । सतगुरु शरण ............................ सुरता बांध शरण में आजा मत झकझोला खाव रे । सतगुरु शरण ............................ कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु सतगुरु तेरा बेड़ा पार लगावे रे । ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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