ओ सतगुरु मेरा साथ निभाना रे ।
काम क्रोध के बीहड़ बन मोहे राह दिखाना रे ॥
लोभ लालच के फँदे पड़ा मैं मुझे मुक्त कराना रे ।
विषय वासना में भटका मैं मुझे संतोष नगर पहुँचाना रे ॥
मानवता की राह चलूँ मैं मेरा आत्मबल बढ़ाना रे ।
परनिंदा से मैं बच सकूँ मुझे सत्संग में लगाना रे ॥
राग द्वेष में भटक न जाऊँ मुझे प्रेम नगरिया पठाना रे ।
कहत लक्ष्मी सुनो सतगुरु मुझे ले शरण मुक्त कराना रे ॥

‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।

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