गुरु बिनु कौन नैया पार लगावै रे।
मात पिता सब जग में, उदर भरण सिखावें रे।।
गुरु बिनु कोन…..
सुत दारा भगिनी भ्राता सब नाते, सदा स्वार्थ की बतरावें रे।।
बणी-बणी में सब साथ निभाते, बिगड़ी में सब भग जावें रे।।
गुरु बिनु कोन…..
गुरु ही होता है सच्चा साथी, जगत में पल-पल साथ निभावे रे।
बिनु कारण गुरु करुणा करे, विपदकाल सहज कटवावे रे।।
गुरु बिनु कोन…..
बिगड़ी में गुरु हाथ पकड़ते, बणी बणी में पीठ थप थपावे रे।।
अवधूत देवीदास मिले गुरु पूरे, लक्ष्मीनारायण नित कृपा पावे रे।।
गुरु बिनु कोन…..