जो करता है प्रभु अच्छा करता है, तू सदा यह बोले।
जो भी करता प्रभु ही करता जगत में, बिनु हरि पत्ता तक नहिं डोले।।
ये सब तेरी कथनी…..
ये सब तेरी कथनी है, नहिं विश्वास रे।
तू कर तो सही भरोसा, प्रभु का तेरी पूर्ण होगी अभिलाष रे।।
ये सब तेरी कथनी…..
हर प्राणी तो है प्रभु का बन्दा, मत करो कोई काम जगत में गन्दा।
सब घट में ही है प्रभु का निवास रे, तू क्यों नहिं करता इस बात का विश्वास रे।।
ये सब तेरी कथनी…..
काम, क्रोध, मद, लोभ के भाव सब गन्दे, जीव के गले में डालें ये चिन्ता के फन्दे।।
माया के कारण ही तू जग में होता उदास रे, प्रभु को तू नहिं जाने वो रहता तेरे पास रे।।
ये सब तेरी कथनी…..
तू अपने मन को दृढ़ कर ले, गुरु की शरण में अब तू चल ले।।
गुरु शरण में ही होगा ज्ञान का उजास रे, निज घट में ही तू प्रभु को तलाश रे।।
ये सब तेरी कथनी…..
प्रभु का कर तू पूर्ण भरोसा, तेरे हृदय में मिलेगा संतोषा।।
लक्ष्मीनारायण को समझाए देवीदास रे, अब मिली शान्ति हो गयी पूर्ण अभिलाष रे।
ये सब तेरी कथनी…..