प्रभु का है सब घट ही धाम रे।
वो ही अल्लाह ईश्वर वो ही रमता राम रे।।
ब्रह्म अखण्ड सबमें ऊर्जा एक समान रे।।
नाम रूप में मत भरमावो यही परम ज्ञान रे।।
मन्दिर-मस्जिद तो सब हैं इन्साँ का काम रे।
बाहिर बिरथा समय न गँवावो निज घट ही ठाम रे।
निज घट में प्रभु मिलेंगे करलो भगति निष्काम रे।।
सहज सरल मन हरि मिलेंगे लक्ष्मी का है ये पैगाम रे।।