मन को निर्मल करके, सतगुरु की कृपा पाले रे।
सतगुरु का पूर्ण करले भरोसा, सतगुरु जगत के रखवाले रे।।
मन को निर्मल…..
सतगुरु का करके सुमिरण, चारि पदारथ झोली भराले रे।।
सतगुरु की शरण में जो रहता, सतगुरु वाकी सब विपदा टाले रे।।
मन को निर्मल…..
सतगुरु की वाणी सुनकर, अज्ञान अंधकार मिटा ले रे।
सतगुरु की कर पद पंकज सेवा, भगति पेड़ उगाले रे।।
मन को निर्मल…..
सतगुरु का दर्शन करके, अड़सठ तीर्थ का पुण्य कमाले रे।।
पूर्ण होगी जगत में सब कामना, लक्ष्मीनारायण सतगुरु को रिझाले रे।।
मन को निर्मल…..