मानवता का अलख जगाने का
मानव को मानव से मिलाने का
अवधूत देवीदास ने संकल्प उठाया
मानव धर्मशास्त्र लिखने का
परम शिष्य लक्ष्मी नारायण को आदेश सुनाया ।
शिष्य ने गुरु के आदेशों को सिरोधार्य किया ।
करि सतगुरु का सुमिरन मानव धर्मशास्त्र का
लेखन शुरू किया ।
गुरु की मिली प्रेरणा आशीर्वाद की
बरसात किया ।
गुरु की कृपा से हर शब्द ने ब्रह्म का
रुप धारण किया ।
नियत समय पर इस महाग्रन्थ का लेखन पूर्ण हुआ ।
ब्रह्म की इसमें शक्ति गुरु का स्वरुप धारण किया ।
अमर ग्रन्थ की रचना ने मानवता को आधार दिया ।
पहले तो सन्त ऋषि मुनि जन सबने तकरार किया ।
पर देख ब्रह्म की शक्ति नतमस्तक हो सबने स्वीकार किया ।
सुख का सागर यह सबका बेड़ा पार किया ।
जय रूप यश वैभव अपार दिया ।
मानवता का बिगुल बजाया सेवा आधार दिया ।
जिसने भी किया अनुसरण उसीका बेड़ा पार किया ।
पाखण्ड मिटाया धरा से गुरु का काम किया ।
धन्य धन्य अवधूत देवीदास मानवता का कल्याण किया ।

‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।

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