सत्संग की महिमा भारी रे।
काम, क्रोध, मद, लोभ नसाए, सत्संग की शक्ति अपारी रे।।
सत्संग की महिमा…..
सत्संग से मति सुधरे़ सबकी, हारे कुसंग सत्संग अगारी रे।।
सत्संग से मन की कल्मष मिटती, मिलती शान्ति अपारी रे।।
सत्संग की महिमा…..
सत्संग से विवेक जग जाता, घट में होती ज्ञान उजियारी रे।।
सत्संग से सदगुण उपजें घट में, सत्संग से पूर्ण कामना सारी रे।।
सत्संग की महिमा…..
सत्संग मिलता है गुरु की कृपा से, सत्संग की गति हरि को प्यारी रे।।
अवधूत देवीदास ने करी बख्शीश, लक्ष्मी मति सत्संग में रंगडारी रे।।
सत्संग की महिमा…..