गुरुदेव क्षमा करो अवगुण मोरे ।
करदो क्षमा आऊँ शरण में तोरे ॥
दयादान की वृत्ति बढ़ा दो हियँ मोरे ।
हे गुरुदेव दयानिधि तुम हो अति भोरे ॥
अवगुणी मैं मूढ़ मति कहूँ लिख कागज कोरे ।
मेरी नैया जग में चलती बस बल तोरे ॥
हे भव तारक पार लगा दो अब मत मारो मचकोरे ।
तुम हो मुझ निर्बल के आधार दास मैं तोरा ।
सब तजि शरण में आऊँ पकड़ो हाथ अब मोरा ॥

‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।

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