ओ मैं तो हो गया निहाल
ओ मैं तो हो गया निहाल
गुरु की शरण में ।
अमृत मैंने पान किया
गुरु के वचनन में ॥
परम सुख का मैंने आभास किया
गुरु की कृपा बरसन में ॥
माया पर गहरी चोट पड़ी
सुन सुन गुरु कथनन में ॥
चिन्ता साँपिन भग गयी
जब आयी गुरु मूरत नयनन में ॥
अज्ञान निसा से मैं जाग उठा
गुरु शब्द सुना जब कानन में ॥
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु
मुक्ति मिलती गुरु चरणन में ॥

‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।

Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangeet Ki Jubani, Satyavani Sangit Mahotsav,