खुद को ना जाने बिना, खुदा नहि मिल पायेगा।
पंथ मतों में मत उलझा, बिरथा जन्म गँवायेगा।।
खुद को ना…..
सतगुरु से हेत लगाले, नहिं तो बिरथा भरमायेगा।।
किसने क्या जाना क्या कहा, तेरे नहिं काम कुछ आयेगा।।
खुद को ना…..
तोतो जैसी रटनी रटकर, चारण भाट तू बन जायेगा।।
मुक्त कराने का जो तू दम्भ भरेगा, तो खुद ही बन्धन में फँस जायेगा।।
खुद को ना…..
खुद के कल्मष खुद देखो, तब समझ में आयेगा।।
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, खुद को जाने भरम सब मिट जायेगा।।
खुद को ना…..