नयन मूंद लिया ध्यान मान लिया, ये तो ध्यान नहिं भाई रे।।
जब आ जाए जागृति हृदय में, सोई जानो ध्यान सच्चा भाई रे।।
नयन मूंद लिया …..
सोवत-जागत उठत-बैठत खावत-पीवत रहे सावधान सोई ध्यान कहाई रे।।
श्वास रोक लिया कान रूँद लिया, ये तो ध्यान नहिं मेरे भाई रे।।
नयन मूंद लिया …..
प्रति श्वास श्वास में जब रहे जागृति, तब हर पल ध्यान लगाई रे।।
जागृति का नाम ही ध्यान है, मत बिरथा भरमावो भाई रे।।
अवधूत देवीदास ने करी बक्सीस, लक्ष्मीनारायण भया ध्यान मगनाई रे।।
नयन मूंद लिया …..