खुद ही खुद को समझो, जगत समझ पड़ाई रे।
खुद का जैसा होता है मन, वैसा ही जगत पड़े दिखाई रे।।
खुद ही खुद…..
जिनके मन होते निर्मल, उनको जग में लगती सरलाई रे।।
जैसा खुद का भाव उठे मन में, वैसा ही जगत लगाई रे।।
खुद ही खुद…..
काम को काममय लगता जगत, कपटी को चहुँदिसि दिखे कपटाई रे।।
लोभी को लोभ ही दिखे जगत में, मन में लोभ का चिन्तन चलाई रे।।
खुद ही खुद…..
राम भक्त को राममय लगता जगत, सबमें राम जानि शीश नवाई रे।।
भावमय होता है जगत सारा, अवधूत देवीदास लक्ष्मी को समझाई रे।।
खुद ही खुद…..