सतगुरु जल्दी आजा दौड़ा-दौड़ा, अब कतई मत कर तू मोड़ा,
मैं तेरे दर पर आया हूँ।।
सतगुरु जल्दी…
जगत ने मुझे बहुत सताया, मेरा मन अब बहुत विकलाया,
अब मैंने जगत से नाता तोड़ा।।
सतगुरु जल्दी…
काम, क्रोध की तप्त सताए मन को, इन्द्रियाँ बिकल दे रही कष्ट तन को,
अब मैंने भगति पथ पर मन को मोड़ा।।
सतगुरु जल्दी…
मान-अपमान की अनल से मुझे बचाले, सतगुरु तेरी शरण में अब मुझे रखा ले,
तू करदे अनुकम्पा मुझ पर थोड़ा।।
सतगुरु जल्दी…
परमारथ पथ पर प्रभु मुझे चला दे, तेरी करुणा के जल में मुझे नहला दे,
मेरी राह के हटा दे सब रोड़ा।
सतगुरु जल्दी…
अब मैं हार चूका हूँ जग से, तब आया हूँ नाथ तेरे दर पे,
लक्ष्मीनारायण पर करदे करुणा थोड़ा।।
सतगुरु जल्दी…