ओ जगत में मत बौराय मन, अन्त:काल पछतायेगा।।
रूपयौवन से तू मत भरमा, ये दो दिनों में ढल जायेगा।।
ओ जगत में…..
धन दौलत में तू मत भटको, धन दौलत सब यहीं रह जायेगा।।
पद सत्ता का मत कर अभिमान, राजपाट एक दिन सब चला जायेगा।।
ओ जगत में…..
कुटुम्ब कबिला में तू मत उलझा, कोई न संग तेरे जायेगा।।
बणी बणी में सब तेरे साथी होंगे, बिगड़ी में अकेला रह जायेगा।।
ओ जगत में…..
सुख के सब होंगे भागीदार, दु:ख तू अकेला पायेगा।।
सतगुरु की शरण ले ले रे लक्ष्मी, सतगुरु ही सच्चा साथ निभायेगा।।
ओ जगत में…..