ओ मनवा मेरे तू मत करि गरब, गरब ने सबको नसाया रे।।
गरब किया राजा बलि ने, पाताल लोक सिधाया रे।।
ओ मनवा मेरे…..
ओ गरब किया था बाली ने, सुग्रीव हाथ मराया रे।।
ओ मनवा मेरे…..
गरब किया था लंकापति रावण ने, कुल सहित नसाया रे।।
गरब किया राजा हरिश्चन्द्र ने, दर-दर वो भटकाया रे।।
ओ मनवा मेरे…..
गरब किया था मुनि नारद ने, नारी मोह में भरमाया रे।।
जिसने भी किया गरब जगत में, अन्त:काल वो पछताया रे।।
ओ मनवा मेरे…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, गरब तजा जिसने वो सुख पाया रे।।
ओ मनवा मेरे…..