सन्त मिलन को चलो रे मेरे भाई, जन्म-जन्म के लो पाप कटाई।
सन्त मिलन का जब भाव उठे मन में, तब तब हृदय प्रेम उमगाई।।
सन्त मिलन को…..
काम, क्रोध, मद, लोभ सब तजना, तभी सन्त मिलन आनन्द पाई।।
अहंकार का भाव न रखना मन में, तभी होगा सन्त मिलन फलदाई।।
सन्त मिलन को…..
श्रद्धा की भावना रखना दिल में, सन्त देगें कृपा बरसाई।।
सन्त होते हैं निर्मल मन के, दया करुणा उनका स्वभाव सुहाई।।
सन्त मिलन को…..
भजन का वो मरम बता देंगे, जन्म-जन्म का बँध कटाई।।
सच्चा मिल जाए जो कोई सन्त जगत में, वो सोता भाग दे जगाई।।
सन्त मिलन को…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, सन्त मिलन सम लाभ किछु नाईं।।
सन्त मिलन को…..