जब कोई चिन्ता उठे तेरे मन में, सतगुरु का करना सुमिरण दिल में।
तुरन्त शान्ति मिल जायेगी।।
जब सब राहें हो जाएँ बन्द जग में, तब आ जाना सतगुरु की शरण में।
तुरत राह मिल जायेगी।।
जब कोई चिन्ता…..
जब कोई साथ ना निभाए जीवन में, तब सौंप देना बागडोर सतगुरु के हाथों में।
तुरत नैया पार लग जायेगी।।
जब कोई चिन्ता…..
जब तू भ्रमित हो जाए जगत में, सतगुरु वचन सुन लेना कानन में।।
तेरी सब भरमना कट जायेगी।।
जब कोई चिन्ता…..
जब तू विचलित हो जाए जगत के भोगों में, तू लगा लेना ध्यान सतगुरु के चरणों में।
तुरत संयम सध जायेगी।।
जब कोई चिन्ता…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, सतगुरु सुमिरण से समस्या सब मिट जायेगी।।