ओ बन्दे तू करले भजन, तेरी बीती जाय जवानी रे।
काम, क्रोध, मद, लोभ को तजि दे, ये पल-पल तोय सतावें अभिमानी रे।।
ओ बन्दे तू…..
माया का तू खुद ही जाल बनाता, मन ही दु:ख का कारण अज्ञानी रे।।
भरी जवानी में भजन तू कर ले, तेरी सुधर जायेगी जिन्दगानी रे।।
ओ बन्दे तू…..
भजन करन से मन निर्मल होगा, निर्मल मन सुख की खानी रे।
भजन भाव से गुरु प्रसन्न होगा, मिलेगो फल तोय मनमानी रे।।
ओ बन्दे तू…..
भजन से चार पदारथ सहज मिलेंगे, भजन की महिमा वेद बखानी रे।।
अवधूत देवीदास के प्रताप से, लक्ष्मीनारायण भजन की महिमा जानी रे।।
ओ बन्दे तू…..