सत्संग की महिमा न्यारी रे।
सत्संग से सदगति मिलती, सब वेद पुराण पुकारी रे।।
सत्संग से सदगति…..
सत्संग में भगति की चाबी मिलती, मिटती मन की बीमारी रे।।
सत्संग में सतगुरु की कृपा बरसे, जगत की मिट जाती विपदा सारी रे।
सत्संग से सदगति…..
सत्संग में ज्ञान का होय उजाला, मिट जाती तम अंधियारी रे।
सत्संग से कलम्ष मिटती मन की, आनन्द उमंग उठे अपारी रे।।
सत्संग से सदगति…..
हरि कृपा से सत्संग मिलता, करो सत्संग छूट जाय संसारी रे।।
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, सत्संग से मिल जाते फल चारी रे।।
सत्संग से सदगति…..