गुरु से मत करि दुराव बन्धु, मति तेरी जग में भरम जायेगी।
गुरु बिनु बीच भँवर में, नैया तेरी अटक जायेगी।।
गुरु से मत…..
गुरु तो होते हैं पथ प्रदर्शक, बिनु गुरु मंजिल नहिं मिल पायेगी।।
गुरु तो होते हैं भाव के भूखे, मत रख कुभाव बात बिगड़ जायेगी।।
गुरु से मत…..
मत कर छल कटप तू गुरु से, प्रकृति तुझसे रूठ जायेगी।।
तू कर पूर्ण समर्पण गुरु को, तुझे गुरु की कृपा मिल जायेगी।
गुरु से मत…..
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु, गुरु शरण में बात सब बन जायेगी।।
गुरु से मत…..