तप बल से बढ़कर नहिं किछु भाई रे, तप बल से ही सब सृष्टि रचाई रे।।
तप से ही सबका पालन-पोषण होता, तप से ही सब प्रकृति चलाई रे।।
तप बल से…..
तप से ही सब कुछ होता, तप का मरम जानो मेरे भाई रे।।
मन में जब इन्द्रियाँ समा जाती, तब तब ही तप हुआई रे।।
तप बल से…..
जिसने कर लिया तप अपने तन में, वाको चार पदारथ मिलाई रे।।
अवधूत देवीदास की कृपा से, लक्ष्मीनारायण तप कराई रे।।
तप बल से…..