बिनु भगत कौन जगत में सुख पाए रे।
बिनु लवण के व्यंजन बनालो, पर खावो तो स्वाद नहिं आए रे।।
बिनु भगति के माया नहिं भगती, माया तो दिवस रैन सताए रे।।
बिनु भगत…..
भगति से शक्ति मिलती, भगति ही काम, क्रोध मिटाए रे।।
कल्मष जिनके मिट जाते मन के, उनके हियँ भगति उमगाए रे।।
बिनु भगत…..
भगति की देख दृढ़ता मन में, प्रभु कृपा बरसाए रे।।
भगति है मुक्ति की दाता, लक्ष्मीनारायण अनुभव गाए रे।।
बिनु भगत…..