राम करे सोई होवे, राम का मरम समझो भाई।।
प्राण तुम्हारा राम है, प्राण ही भाव उपजाई।।
राम करे…..
भावों से बुद्धि उपजै, बुद्धि ही क्रिया कराई।।
बुद्धि को निर्मल करलो, सब सुकृत कर्म हो जाई।।
राम करे…..
बिनु प्राण बुद्धि निर्मल नहिं होवे, चाहे लाख करो उपाई।।
प्राण को निर्मल करलो, सब झंझट मिट जाई।।
राम करे…..
राम का मरम समझ पड़ेगा, निज घट के माईं।।
निज का राम करे सोई होता, लक्ष्मीनारायण निज अनुभव गाई।।
राम करे…..