जड़ चेतन सब गुण दोषमय, भाई मन में करो विचार।
सुसंग से गुण नित बढ़ते, कुसंग से उपजें सब विकार।।
जड़-चेतन…..
सत्संग है खान गुणों की, बरसें सद्गुण बेशुमार।।
गुरु की कृपा से सत्संग मिलता, मिलते सहज पदारथ चार।।
जड़-चेतन…..
गुरु की शरण जब मिल जाती, खुल जाते हृदय पटल के किवाड़।।
जगत के गुण दोषों में मत उलझो, बस सत्संग का ले लो आधार।।
जड़-चेतन…..
गुरु हंसा क्षीर नीर अलग करेंगे, सदगुणों की करेंगे बौछार।।
गुरु अवधूत देवीदास ने कृपा करी, लक्ष्मीनारायण के मिटा दिए विकार।
जड़-चेतन…..